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किफ़ायत के आदेशः भाषण छोटे किए जाएँगे, ठेलों में ही रोड शो

 

पार्टी ने आदेश किया, “टॉप-टू-बॉटम लेवल के सभी नेताजी ऑनलाइन मीटिंग के लिए उपस्थित हो जाएँ। हमें महत्त्वपूर्ण चर्चा करनी है।”

ऐसी मीटिंग शुरू हुई तो एक नेता ने अपनी आईडी छिपाकर सवाल किया, “आपने सबको इकट्ठा होने की सूचना दी थी, उसमें टॉप और बॉटम का मतलब किस अर्थ में लेना है? पद के हिसाब से? भ्रष्टाचार के आरोपों के हिसाब से? नैतिकता के हिसाब से? या फिर चुनाव में मिली बढ़त के हिसाब से?”

दूसरे नेताजी ने भी ऐसा ही सवाल किया, “हमारी पार्टी में कोई लेवल बचा भी है क्या? सब के सब लेवाल ही बैठे हैं।”

तीसरे नेता ने कहा, “भई, अभी तो पार्टी में जो लोग जितना ज़्यादा बॉटम लेवल पर जाते हैं, उन्हें उतने ही बड़े टॉप पद तुरंत मिल जाते हैं।”

पार्टी इस तकरार से तंग आ गई और आख़िर मजबूरी में ऑफ़लाइन यानी आमने-सामने की मीटिंग बुलानी पड़ी। हालाँकि, निर्देश दिया गया कि कोई भी सरकारी गाड़ी लेकर नहीं आएगा। ठेकेदारों या बिजनेसमैनों की गाड़ियों में आना हो तो छूट है।

मीटिंग के समय नेताजी सशरीर उपस्थित हुए। हाईकमान ने कहा, “देखिए, हम सबको किफ़ायत करनी है। दूसरे सभी ख़र्चों के साथ-साथ हमें वाणी ख़र्च भी कम करना है। इसलिए सभी नेताओं को आदेश दिया जाता है कि भाषणों में भी किफ़ायत करें। जहाँ 90 मिनट के भाषण से काम चल जाता हो, वहाँ बेवजह 95 मिनट का भाषण न करें।”

एक वरिष्ठ नेता ने मुँह लटकाकर कहा, “ऐसा कठोर नियम क्यों ला रहे हैं? हमारे लिए तो भाषण ही शासन है। दिन-रात भाषण नहीं करेंगे तो जनता को भ्रमित कैसे करेंगे? भाषण ही हमारी सबसे बड़ी ढाल है और भाषण ही हमारी तलवार।”

हाईकमान बोला, “पहले निर्देश सुन लीजिए, फिर टिप्पणी कीजिए। जैसे कि अब से उद्घाटन करने के लिए कारों के क़ाफ़िले के साथ जाने के बजाय हाथ में कैंची लेकर उद्घाटन पदयात्रा निकालनी होगी। रोड शो भी कार या बड़ी गाड़ियों के बजाय हाथठेले में करना होगा। इस बहाने पार्टी के देवदुर्लभ कार्यकर्ताओं को हमें धक्का मारने का सौभाग्य भी मिलेगा। इसके अलावा सार्वजनिक जगहों पर लगाए जाने वाले होर्डिंगों की संख्या कम करनी होगी या फिर होर्डिंगों का साईज़ घटाना होगा।”

यह निर्देश सुनकर एक नेता ने पूछा, “अच्छा? साईज़ घटाना हो तो हमें राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर वार्ड स्तर के कार्यकर्ता तक सभी के जो फोटो छापने होते हैं, उनमें से किसके फोटो काटने हैं?”

तभी एक दूसरे नेता खड़े होकर बोले, “पालिका से लेकर संसद तक के चुनावों में मुझे काटा गया है। अगर अब होर्डिंग में भी काटा गया तो मैं बिलकुल बरदाश्त नहीं करूँगा।”

दूसरे नेता ने जवाब दिया, “आपकी फोटो होर्डिंग में छापते हैं तो उल्टे पार्टी के वोट कम हो जाते हैं।”

बात बढ़ गई और नेता बिना किसी किफ़ायत के खुले हाथों से मारपीट पर उतर आए।

पार्टी ने चाय-नाश्ते का ख़र्च बचाकर मीटिंग स्थगित कर दी।

(नेता ख़र्च करने में किफ़ायत शायद कर लें, कमाने में तो ज़रा भी नहीं करेंगे) 

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