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मेरी अन्तिम इच्छा

 

जीवन-यात्रा जिस दिन उस मोड़ पर पहुँचेगी, 
आत्मा मेरी जब यह नश्वर शरीर छोड़ने लगेगी, 
चाहती हूँ मैं तब शान्तिपूर्वक व मुस्कुराती जाऊँ, 
चलें, अपनी अन्तिम इच्छा आज बतलाती जाऊँ। 
 
विनती है मेरी कि मेरे इर्द-गिर्द भीड़ नहीं लगाना, 
अर्थी उठाने हेतु किराए के चार व्यक्ति ले आना, 
बड़ी गाड़ी, न पुष्प, न ही कोई पण्डित बुलवाना, 
सादा से बक्से में रखकर मुझे श्मशान ले जाना। 
 
न क्रिया-कर्म या किसी प्रकार की पूजा करवाना, 
न भाषण का आयोजन, न ही शोकसभा रखवाना। 
हाँ, सम्भव हो तो किसी दिन टेम्स नदी चले जाना, 
मेरे प्रिय स्थल पर राख़ मेरी विसर्जित कर आना।

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