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हरितालिका व्रत पर दोहे

 

भाद्र तीज का व्रत कठिन, निर्जल व्रत उपवास। 
शिव पूजन नारी करें, पति जीवन की आस॥
 
काया तप की दीपिका, मन श्रद्धा का द्वार। 
भाद्र तीज की रात में, सजे प्रेम संसार॥
 
भाद्र तीज में नारियाँ, करतीं मंगल गान। 
पार्वती संग शिव हृदय, प्रेमामृत का पान॥
 
निर्जल व्रत उपवास है, मन में ख़ुशी अपार। 
पिया आयु की दीर्घता, व्रत का है आधार॥
 
सखी संग मिल पूजतीं, उमा संग शिव आज। 
सुखी रहें परिवार संग, पूरे हों सब काज॥
 
धरा सजी हरियाल से, सखियाँ झूलें डार। 
मन मंदिर में पूजतीं, उमा महेश उदार॥
 
पति की आयु कामना, जीवन सुख का संग। 
भाद्र तीज का व्रत भरे, मन में मधुर उमंग॥
 
शिव शंकर की आरती, पार्वती का ध्यान। 
तन-मन सब अर्पित करे, पावन हो अभियान॥
 
भक्ति-भाव के फूल से, सजा फुलेरा तीज। 
निर्जल व्रत निशि जागरण, पिया प्रेम के बीज। 
 
तीजा व्रत की साधना, मन में उमा महेश। 
सुखी रहें परिवार सब, सारे मिटें क्लेश। 
 
आशीषों की बारिशें, पूरण सब अरमान। 
भाद्र शुक्ल की तीज का, अटल सुहाग विधान॥

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