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विवेकानंद जी पर दोहे

 

जागो भारत के युवा, जागृत सारा देश। 
शक्ति के तुम पुंज हो, पहचानो निज वेश॥ 
 
उठो बढ़ो विश्वास से, मानो मत तुम हार। 
स्वामी जी के वचन में, जीवन का विस्तार॥ 
 
नारायण नर में रहें, यह संदेश महान। 
सेवा में ही साधना, यह विवेक का ज्ञान॥ 
 
युवा शक्ति सम्पत्ति है, जिसके स्वप्न अनंत। 
युवा शक्ति ही गढ़ेगी, भारत शौर्य दिगंत॥ 
 
डर मन से छोड़ो युवा, साहस का हो वास। 
स्वामी जी ने ही दिया, मन को बुद्धि विलास॥ 
 
धर्म नहीं संकीर्णता, प्रेम बने आधार। 
मानवता के दीप से, उजला हो संसार॥ 
 
शब्द-शब्द मणि मोल हैं, हैं विचार अनमोल। 
निष्क्रियता को तोड़ते, स्वामी जी के बोल॥ 
 
भरी सभा में गूँजता, जय भारत का नाम। 
जय वसुधैव कुटुंबकम्, बना विश्व का धाम॥ 
 
शहर शिकागो की सभा, पश्चिम का अतिरेक। 
सारा जग विस्मित हुआ, सुनकर वचन विवेक॥ 
 
ज्ञान भक्ति निज कर्म से, एकनिष्ठ व्यवहार। 
मानवता के हित रहे, मानव का आचार॥ 
 
युग युग की है प्रेरणा, स्वामी जी का ज्ञान। 
हो विवेक के स्वप्न सा, भारत राष्ट्र महान॥

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