अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता गीत-नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका कविता-सेदोका महाकाव्य चम्पू-काव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई क़ता सजल

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सांस्कृतिक आलेख सामाजिक चिन्तन शोध निबन्ध ललित निबन्ध हाइबुन काम की बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य सिनेमा चर्चा ललित कला स्वास्थ्य

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा यात्रा वृत्तांत डायरी रेखाचित्र बच्चों के मुख से बड़ों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य लघुकथा बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

पत्र कार्यक्रम रिपोर्ट सम्पादकीय प्रतिक्रिया पर्यटन

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

तुम कमज़ोर नहीं हो

 

मैं जानता हूँ
सोने की देहलीज़ के भीतर
कितनी काली रातें बसती हैं
जहाँ धन की चकाचौंध में
मानवता सबसे पहले मरती है
 
तुम्हारा दुख
किसी अभाव का नहीं
अपमान की उस निरंतर वर्षा का है
जो हर दिन
तुम्हारे मौन को भिगो देती है
 
जिस घर में
सम्बन्धों का मूल्य सिक्कों से आँका जाए
वहाँ प्रेम
सबसे असहाय हो जाता है
और पति
केवल एक पद रह जाता है
संवेदना नहीं
 
पर सुनो 
तुम कमज़ोर नहीं हो
तुम्हारा सहना
कायरता नहीं
तुम्हारी शक्ति का प्रमाण है
 
तुम्हारी आँखों में
अब भी उजाले की ज़िद है
तुम्हारे भीतर
अब भी एक स्त्री जीवित है
जो हार मानना नहीं जानती
 
मैं चाहता हूँ
तुम स्वयं को दोषी मानना छोड़ो
किसी और की हीनता
तुम्हारा अपराध नहीं होती
 
जिस दिन
तुम अपने दुख को
अपनी नियति मानने से इनकार करोगी
उसी दिन
तुम्हारा जीवन
नई दिशा ले लेगा
 
सत्य तुम्हारे साथ है
छाया की तरह नहीं
बल्कि उस भरोसे की तरह
जो तुम्हें खड़ा होना सिखाए। 
 
रोना यदि ज़रूरी हो
तो रो लो
पर टूट मत जाना
क्योंकि जो स्त्री
इतना सह सकती है
वह एक दिन
अपने लिए रास्ता भी बना लेती है
 
तुम्हारा जीवन
किसी के धन की दया पर नहीं
तुम्हारे साहस की शर्तों पर चलेगा
बस
ख़ुद पर विश्वास करना मत छोड़ना
 
सुनो
अब प्रश्न केवल सहने का नहीं
चुनने का है
रिश्तों की परछाईं
या अपने स्वाभिमान का सूर्य
 
मैं जानता हूँ
यह निर्णय सरल नहीं
क्योंकि हर स्त्री को सिखाया गया है
रिश्ते बचाना पुण्य है
चाहे आत्मा ही क्यों न टूट जाए
 
पर सुनो
जो सम्बन्ध तुम्हें
हर दिन छोटा करता जाए
तुम्हारी गरिमा को
मोलभाव की वस्तु बना दे
वह सम्बन्ध नहीं
एक ज़ंजीर होता है
 
तुम बाहर कैसे निकलोगी
यह किसी एक क़दम का नाम नहीं
यह धीरे धीरे
अपने भीतर उठ खड़े होने की प्रक्रिया है। 
 
पहले स्वयं से यह स्वीकार करो
कि पीड़ा तुम्हारी नियति नहीं
फिर किसी विश्वास योग्य आवाज़ को
अपने दुख का साक्षी बनाओ
मौन सबसे बड़ा शत्रु होता है। 
 
डरो मत
आगे बढ़ो
कमज़ोर मत बनो
यह आत्मरक्षा का 
प्रथम साहस है
 
यदि रिश्ता
तुम्हें मनुष्य नहीं रहने देता
तो उसे निभाना धर्म नहीं
और यदि स्वाभिमान बचाने के लिए
कुछ दूरी आवश्यक हो
तो वह पलायन नहीं
स्वस्थ चयन है
 
याद रखना
जो तुम्हें सच में चाहता है
वह तुम्हारी चुप्पी नहीं
तुम्हारी मुस्कान का रक्षक बनेगा
 
मैं यह नहीं कहता
तुरंत सब छोड़ दो
मैं केवल इतना कहता हूँ
अपने अस्तित्व को
आख़िरी पायदान पर मत रखो
 
कभी कभी
रिश्ते छोड़ने से नहीं
अपने आप को बचाने से
जीवन आगे बढ़ता है
 
और जिस दिन
तुम अपने निर्णय को
अपराध नहीं समझोगी
उसी दिन
तुम सच में मुक्त हो जाओगी
 
देखना एक दिन 
सभी
तुम्हारे साथ होंगे
निर्णय में नहीं
बल्कि उस विश्वास में
कि तुम स्वयं को चुन सकती हो। 

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

'जो काल्पनिक कहानी नहीं है' की कथा
|

किंतु यह किसी काल्पनिक कहानी की कथा नहीं…

14 नवंबर बाल दिवस 
|

14 नवंबर आज के दिन। बाल दिवस की स्नेहिल…

16 का अंक
|

16 संस्कार बन्द हो कर रह गये वेद-पुराणों…

16 शृंगार
|

हम मित्रों ने मुफ़्त का ब्यूटी-पार्लर खोलने…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता

बाल साहित्य कविता

लघुकथा

स्मृति लेख

दोहे

कहानी

कविता-मुक्तक

साहित्यिक आलेख

सांस्कृतिक आलेख

काम की बात

सामाजिक आलेख

कविता - हाइकु

ऐतिहासिक

कविता - क्षणिका

चिन्तन

व्यक्ति चित्र

किशोर साहित्य कहानी

सांस्कृतिक कथा

हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी

ललित निबन्ध

गीत-नवगीत

स्वास्थ्य

खण्डकाव्य

नाटक

रेखाचित्र

काव्य नाटक

यात्रा वृत्तांत

हाइबुन

पुस्तक समीक्षा

हास्य-व्यंग्य कविता

गीतिका

अनूदित कविता

किशोर साहित्य कविता

एकांकी

ग़ज़ल

बाल साहित्य लघुकथा

सिनेमा और साहित्य

किशोर साहित्य नाटक

विडियो

ऑडियो

उपलब्ध नहीं