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हिंदू नव वर्ष पर कुंडलियाँ छंद

 

1. कुंडलिया
 
नव संवत्सर आगमित, ध्वनित सुमंगल गान। 
चैत्र-प्रभा से दीप्तिमय, पुलकित जीवन मान॥
पुलकित जीवन मान, कलश-कुंकुम से साजित। 
तोरण है हर द्वार, सुमन-रंगों से राजित। 
नव आशा का स्पंद, हृदय में रचता नव स्वर। 
नव चेतन दिनमान, आगमित नव संवत्सर॥

2. कुंडलिया 

चैत्री प्रथमा शुक्ल की, सुरभित सकल प्रकाश। 
आम्र मंजरी गंध से, जागा नव उल्लास॥
जागा नव उल्लास, पवन मधुमय रस लाया। 
पुष्प पराग प्रवीण, भँवर कलियों पर छाया। 
नव जीवन का राग, प्रकृति मानव की मैत्री। 
जाग्रत शुभ संकल्प, आगमित प्रथमा चैत्री॥

3. कुंडलिया

मंगलमय नव वर्ष यह, लाया शुभ संदेश। 
स्नेह-सुधा से सींचिए, हर्षित नव परिवेश॥
हर्षित नव परिवेश, उमगता श्रद्धा सागर। 
आलोकित पथ धर्म, हुए सत्कर्म उजागर। 
कह सुशील कविराय, मिटे कटुता का जंगल। 
शुभ्र सृजन का पर्व, वर्ष नव सबको मंगल॥

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