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नृसिंह स्तवन


नाराच छंद

 

प्रचण्ड दंष्ट्र धारिणं! अतीन्द्र दर्प वारिणं! 
प्रह्लाद कष्ट तारिणं! सुभक्त भाग्य कारिणं! 
कराल वक्र नासिकं! त्रिलोक त्रास भंजनं! 
नमामि नित्य त्वां पदम् भजामि देव नृसिंह वन्दनं॥१॥
 
विदारि स्तंभ आगतं! महोदरं सुजागृतं! 
सुरासुरैः सुचिन्तितं! महाभयं विनाशितं! 
उदग्र केश राजितं! महातपः प्रकाशितं! 
नमामि नित्य त्वां पदम् भजामि देव नृसिंह शुभ्रतं॥२॥
 
नखाग्र तीक्ष्ण धारिणं! दनुज दर्प विदारिणं! 
उरः विदार कारिणं! महोग्र रूप धारिणं! 
प्रकोप ज्वाल मालिनं! भयङ्करं मयानलम। 
नमामि नित्य त्वां पदम् भजामि देव भक्त वल्लभं॥३॥
 
प्रह्लाद अंक धारिणं! कृपासुधा प्रवारिणं! 
सुभक्ति भाव चारिणं! मनोमलापहारिणं! 
सदैव भक्त रक्षिणं! दुरन्त पाप भक्षिणं! 
नमामि नित्य त्वां पदम् भजामि देव दैन्य नाशिनं॥४॥
 
कपाल कंप कारिणं! दिगन्त घोष धारिणं! 
महाप्रताप भारिणं! रिपुन्द्र प्राण हारिणं! 
धरा धुरीं चलावितं! गगन कपाट खण्डतम्। 
नमामि नित्य त्वां पदम् भजामि देव तेज मण्डितं॥५॥
 
अधर्म मूल छेदकं! प्रदुष्ट वृन्द भेदकं! 
सुमन्त्र चित्त बोधकं! सुनीति मार्ग शोधकं! 
कुबुद्धि दर्प मोचकं! सुदैत्य गर्व! खण्डतम्। 
नमामि नित्य त्वां पदम् भजामि देव मोह भंजकं॥६॥
 
सुवेद वेद्य रूपिणं! महामहिम सुदीपिणं! 
सुरेन्द्र वन्द्य भूपिणं! मुनीन्द्र चित्त तीर्थिनं! 
अनन्त शक्तिधारिणं! सदाशिवांश चारिणं! 
नमामि नित्य त्वां भजामि देव लोक तारिणं॥७॥
 
हृदि प्रतिष्ठितो भवम्! मदीय चेत आलयम्! 
हरस्व पाप संचयं! प्रदीप्त ज्ञान माल्यम्! 
कृपालु नाथ पाहि माँ! भवाब्धि देव आद्यतम्। 
नमामि नित्य त्वां भजामि देव नृसिंह शाश्वतम्॥८॥

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