अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता गीत-नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका कविता-सेदोका महाकाव्य चम्पू-काव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई क़ता सजल

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सांस्कृतिक आलेख सामाजिक चिन्तन शोध निबन्ध ललित निबन्ध हाइबुन काम की बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य सिनेमा चर्चा ललित कला स्वास्थ्य तकनीकी

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा यात्रा वृत्तांत डायरी रेखाचित्र बच्चों के मुख से बड़ों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य लघुकथा बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

पत्र कार्यक्रम रिपोर्ट सम्पादकीय प्रतिक्रिया पर्यटन

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

पर्यावरण पर दोहे

 

काटे वन, फिर ढूँढ़ते, छाया शीतल ठाँव। 
अपने ही अपराध से, उजड़े सारे गाँव॥

नदियाँ रोती मौन हैं, विष उगलें उद्योग। 
जल जो जीवन था कभी, बन बैठा अब रोग॥
 
सूखी बावड़ियाँ कहें, लौटो अपनी ओर। 
बूँद बचाओ आज ही, वरना सूखी भोर॥
 
प्लास्टिक की है सभ्यता, चमकीला अभिशाप। 
धरती माता सह रही, प्रतिपल का संताप॥
 
पीपल, बरगद, नीम सब, उजड़े गाँव-उपांत। 
कंक्रीटों के शहर में, जीवन खड़ा अशांत॥
 
ग्रीष्म दहकता आग सा, झुलसे वन-उद्यान। 
मानव के ही लोभ से, मिटे खेत-खलिहान॥
 
गौरैया का मौन अब, देता मन को चीर। 
नीड़ सभी ख़ाली पड़े, रोती धरा अधीर॥
 
धरती माँ की देह पर, गहरी पड़ी दरार। 
लोभ मनुज का खा गया, हरा भरा संसार॥
 
संकल्पित जन ही करें, सच्चे मन से काम। 
जल, जंगल, मिट्टी बचें, तभी बचे अविराम॥
 
पर्यावरण बचाइए, यही समय की बात। 
वरना संतति आपकी, कोसेंगी दिनरात॥

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

अँधियारे उर में भरे, मन में हुए कलेश!! 
|

मन को करें प्रकाशमय, भर दें ऐसा प्यार! हर…

अंकित
|

(स्थान-5 मात्रा उच्चारण)    'राना'…

अटल बिहारी पर दोहे
|

है विशाल व्यक्तित्व जिमि, बरगद का हो वृक्ष। …

अभिमान
|

  नित्य बचें अभिमान से, धैर्य धरें…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

दोहे

बाल साहित्य कविता

कविता

नाटक

हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी

स्मृति लेख

व्यक्ति चित्र

गीत-नवगीत

कहानी

कविता-मुक्तक

लघुकथा

सांस्कृतिक आलेख

ललित निबन्ध

सामाजिक आलेख

चिन्तन

साहित्यिक आलेख

काम की बात

कविता - हाइकु

ऐतिहासिक

कविता - क्षणिका

किशोर साहित्य कहानी

सांस्कृतिक कथा

स्वास्थ्य

खण्डकाव्य

रेखाचित्र

काव्य नाटक

यात्रा वृत्तांत

हाइबुन

पुस्तक समीक्षा

हास्य-व्यंग्य कविता

गीतिका

अनूदित कविता

किशोर साहित्य कविता

एकांकी

ग़ज़ल

बाल साहित्य लघुकथा

सिनेमा और साहित्य

किशोर साहित्य नाटक

विडियो

ऑडियो

उपलब्ध नहीं