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नव वर्ष पर दोहे – 2026

 

नया वर्ष नव भोर है, नव स्वप्नों की धूप। 
मन के आँगन में खिले, आशा मधुर स्वरूप। 
 
बीते कल की पीर को, ख़ुशियों में लो ढाल। 
नए वर्ष में प्रेम का, चारों ओर धमाल। 
 
मन अंतस विश्वास हो, घृणा, द्वेष विच्छेद। 
नया वर्ष हो सार्थक, जब मिट जाए भेद
 
बैर क्रोध अंगार को, ठंडा कर दो आज। 
नए वर्ष से माँग लो, अपनेपन का साज़। 
 
मन का दीप जलाइए, द्वेष तिमिर हो नाश। 
नए वर्ष संकल्प में, जीवन ज्योति प्रकाश। 
 
जो रूठे इस वर्ष में, उन्हें मनाएँ आज। 
नए वर्ष की भोर में, ऊँची हो परवाज़। 
 
हँसी, दर्द मिल बाँट लें, रिश्ते हों मन रत्न। 
नए वर्ष की राह में, सांझे यत्न प्रयत्न। 
 
शब्दों की हो माधुरी, हृदय भरा हो नेह। 
नया वर्ष तब ही सफल, हर्षित हो सब गेह। 
 
बीता कल अब जा चुका, उस पर मत रो आज। 
नये वर्ष को थाम कर, सुफल करो सब काज। 
 
नया वर्ष जीवन सुमन, ख़ुशियों का विस्तार। 
संवेदन का पर्व है, सृष्टि बनी परिवार। 
 
सुशील शर्मा
नव वर्ष की हार्दिक मंगलकामनाएँ

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