अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता गीत-नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका कविता-सेदोका महाकाव्य चम्पू-काव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई क़ता सजल

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सांस्कृतिक आलेख सामाजिक चिन्तन शोध निबन्ध ललित निबन्ध हाइबुन काम की बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य सिनेमा चर्चा ललित कला स्वास्थ्य

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा यात्रा वृत्तांत डायरी रेखाचित्र बच्चों के मुख से बड़ों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य लघुकथा बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

पत्र कार्यक्रम रिपोर्ट सम्पादकीय प्रतिक्रिया पर्यटन

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

राम नवमी पर दोहे

 

प्रकट हुए श्री राम जब, जागे अंतःप्राण। 
मर्यादा की ज्योति से, मिला जगत को त्राण। 
 
वनपथ त्यागे राज सुख, साधा सत्य विचार। 
जीवन मर्यादित हुआ, तप ही उज्ज्वल सार॥
 
सीता करुणा साक्षिणी, लक्ष्मण जाग्रत ध्यान। 
रेखा भीतर संयमित, बाहर दृढ़ आधान॥
 
राज्य नहीं भूखंड बस, नहीं नीति विस्तार। 
सेवा से परिपूर्ण हो, शासन का व्यवहार॥
 
समता मूलक राज्य ही, रामराज्य के प्राण। 
हर आँसू को न्याय है, हर जीवन को त्राण। 
 
लंकापति के गर्व से, ज्ञान हुआ अज्ञान। 
रामबाण से संतुलन, लंका ध्वंस विधान॥
 
युग बदले संदर्भ भी, किन्तु न बदले राम। 
जीवन के हर युद्ध में, जय देता प्रभु नाम॥
 
चमक दमक के बीच भी, स्मृति में हों श्री राम। 
प्रगति संग समृद्ध हो, जीवन के आयाम॥
 
अंतर में जब प्रश्न हों, विचलित मन का धाम। 
संवादों के मौन में, पथदर्शी श्रीराम॥
 
नवमी का यह पुण्य दिन, मिटे सकल अज्ञान। 
मर्यादामय आचरण, जीवन सुखद विहान॥

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

अँधियारे उर में भरे, मन में हुए कलेश!! 
|

मन को करें प्रकाशमय, भर दें ऐसा प्यार! हर…

अंकित
|

(स्थान-5 मात्रा उच्चारण)    'राना'…

अटल बिहारी पर दोहे
|

है विशाल व्यक्तित्व जिमि, बरगद का हो वृक्ष। …

अभिमान
|

  नित्य बचें अभिमान से, धैर्य धरें…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता-मुक्तक

कविता

दोहे

गीत-नवगीत

सांस्कृतिक आलेख

बाल साहित्य कविता

लघुकथा

साहित्यिक आलेख

स्मृति लेख

कहानी

काम की बात

सामाजिक आलेख

कविता - हाइकु

ऐतिहासिक

कविता - क्षणिका

चिन्तन

व्यक्ति चित्र

किशोर साहित्य कहानी

सांस्कृतिक कथा

हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी

ललित निबन्ध

स्वास्थ्य

खण्डकाव्य

नाटक

रेखाचित्र

काव्य नाटक

यात्रा वृत्तांत

हाइबुन

पुस्तक समीक्षा

हास्य-व्यंग्य कविता

गीतिका

अनूदित कविता

किशोर साहित्य कविता

एकांकी

ग़ज़ल

बाल साहित्य लघुकथा

सिनेमा और साहित्य

किशोर साहित्य नाटक

विडियो

ऑडियो

उपलब्ध नहीं