अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता गीत-नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका कविता-सेदोका महाकाव्य चम्पू-काव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई क़ता सजल

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सांस्कृतिक आलेख सामाजिक चिन्तन शोध निबन्ध ललित निबन्ध हाइबुन काम की बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य सिनेमा चर्चा ललित कला स्वास्थ्य तकनीकी

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा यात्रा वृत्तांत डायरी रेखाचित्र बच्चों के मुख से बड़ों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य लघुकथा बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

पत्र कार्यक्रम रिपोर्ट सम्पादकीय प्रतिक्रिया पर्यटन

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

ज़ख्म दिल के अब किसी को भी दिखाना है नहीं

 

फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाइलुन
2122    2122    2122    212
 
ज़ख्म दिल के अब किसी को भी दिखाना है नहीं,
दर्द अपना हर किसी को भी बताना है नहीं।
 
काँच के ऊँचे महल वाले भुलाकर चल दिए,
उन अमीरों की गली में अब तो जाना है नहीं।
 
जिसको समझे थे इबादत, दर्द निकला उम्र भर,
इस फ़रेबी प्यार का अब बोझ ढोना है नहीं।
 
झूठ और मतलब की दुनिया रास आई है तुम्हें,
पाक रिश्तों की क़दर दिल से निभाना है नहीं।
 
हाथ झटका और उठ आए तेरी महफ़िल से हम,
स्वाभिमान अपना किसी दर पर गँवाना है नहीं।
 
दर्द की हर रात काटी मुस्कुराकर हमने अब,
आँसुओं को सामने सबके बहाना है नहीं।
 
जो हमें ठुकरा गए थे वक़्त के बहकाव में,
उनको अपना हाल फिर से अब सुनाना है नहीं।
 

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

 कहने लगे बच्चे कि
|

हम सोचते ही रह गये और दिन गुज़र गए। जो भी…

 तू न अमृत का पियाला दे हमें
|

तू न अमृत का पियाला दे हमें सिर्फ़ रोटी का…

 मिलने जुलने का इक बहाना हो
|

 मिलने जुलने का इक बहाना हो बरफ़ पिघले…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता

साहित्यिक आलेख

ग़ज़ल

दोहे

बाल साहित्य कविता

नाटक

हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी

स्मृति लेख

व्यक्ति चित्र

गीत-नवगीत

कहानी

कविता-मुक्तक

लघुकथा

सांस्कृतिक आलेख

ललित निबन्ध

सामाजिक आलेख

चिन्तन

काम की बात

कविता - हाइकु

ऐतिहासिक

कविता - क्षणिका

किशोर साहित्य कहानी

सांस्कृतिक कथा

स्वास्थ्य

खण्डकाव्य

रेखाचित्र

काव्य नाटक

यात्रा वृत्तांत

हाइबुन

पुस्तक समीक्षा

हास्य-व्यंग्य कविता

गीतिका

अनूदित कविता

किशोर साहित्य कविता

एकांकी

बाल साहित्य लघुकथा

सिनेमा और साहित्य

किशोर साहित्य नाटक

विडियो

ऑडियो

उपलब्ध नहीं