अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

मेरी भूमिका

विश्व महिला दिवस पर मातृशक्ति को समर्पित

 

सृष्टि के प्रथम सोपान से
आज के अविरल विकास महान तक। 
मेरी भूमिका का संदर्भ
अहो! प्रश्न चिह्न कितना दुःखद। 
 
सनातन संस्कृति का आरंभ
सृष्टि के प्रथम बीज का रोपण
मेरी गर्भनाल से प्रारम्भ। 
आदि मानव की संगनी से लेकर
व्यस्ततम प्रगति सोपानों तक
मेरी भूमिका का संदर्भ
अहो! प्रश्न चिह्न कितना दुःखद। 
 
ऋग्वेद से लेकर बाज़ारीकरण तक
कितनी अकेली मेरी अंतस यात्रा
हर समय सिर्फ़ त्याग और बलिदान। 
न जी सकी कभी अपना काल
सदा बनती रही पूर्ण विराम। 
विकास के अविरल पथ पर
मेरी भूमिका का संदर्भ
अहो! प्रश्न चिह्न कितना दुःखद। 
 
मैं दुर्गा गार्गी मैत्रयी से लेकर
वर्तमान की अत्याधुनिक वेषधारी
कितनी असहनीय अमानवीय यात्रओं को सहती। 
मेरे तन ने अनेक रूप बदले
मन लेकिन वही सात्विक शुद्ध
मानवीय मूल्यों को समेटे
नित नए संकल्पों में विकल्प ढूँढ़ती
मेरी भूमिका का संदर्भ
अहो! प्रश्न चिह्न कितना दुःखद। 
 
क्षितिज के पार महाकाश दृश्य
शब्दों सी स्वयं प्रकाशित स्वयं सिद्ध
काल की सीमाओं से परे मेरा व्यक्तित्व। 
देश नहींं विश्व निर्माण में मेरा अस्तित्व। 
मेरी भूमिका का संदर्भ
अहो! प्रश्न चिह्न कितना दुःखद। 
 
हर युग हर काल में मेरा रुदन
विरोधाभास और विडम्बनाएं गहन
अंतस में होता हमेशा मेरे नव सृजन
हर देश हर काल का विकास पथ
है मेरे इतर शून्यतम। 
मेरी भूमिका का संदर्भ
अहो! प्रश्न चिह्न कितना दुःखद। 

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

'जो काल्पनिक कहानी नहीं है' की कथा
|

किंतु यह किसी काल्पनिक कहानी की कथा नहीं…

14 नवंबर बाल दिवस 
|

14 नवंबर आज के दिन। बाल दिवस की स्नेहिल…

16 का अंक
|

16 संस्कार बन्द हो कर रह गये वेद-पुराणों…

16 शृंगार
|

हम मित्रों ने मुफ़्त का ब्यूटी-पार्लर खोलने…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

उपलब्ध नहीं