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तुम हमें यूँ भुला न पाओगे

 

तुम हमें यूँ भुला न पाओगे
हम केवल कुछ चेहरे नहीं थे
हम वह समय थे
जो तुम्हारी धड़कनों के साथ
एक लय में बीता था
 
तुम मुझे यूँ भुला न पाओगे
मैं तुम सबकी स्मृतियों की तहों में
धीरे से रखा हुआ
वह अक्षर हूँ
जिसे समय की धूल
मिटा तो सकती है
पर नष्ट नहीं कर सकती। 
 
कभी हम
एक ही दोपहर के हिस्से थे
एक ही छाँव में बैठकर
हँसी के उजाले बाँटते थे
बातें इतनी सरल थीं
कि उनमें कोई अर्थ नहीं खोजा जाता था। 
 
याद है न
वे दिन
जब हम सब
एक ही आकाश के नीचे
अपने अपने सपनों को
एक दूसरे की आँखों में पढ़ते थे। 
 
सुख आया
तो हँसी बाँट ली
दुःख आया
तो कंधे बाँट लिए
किसी एक की थकान
सबकी चिंता बन जाती थी। 
 
हमने
एक दूसरे के लिए
अनगिनत बार
छोटे छोटे हाथ बढ़ाए
बिना यह सोचे
कि बदले में क्या मिलेगा, 
हमने
एक दूसरे के लिए
छोटे छोटे त्याग किए
बिना किसी घोषणा के
बिना किसी प्रतिदान की अपेक्षा के। 
 
कभी
हमने लड़ाई भी की
शब्दों ने
सीमाएँ लाँघीं
अहम ने
क्षण भर के लिए
अपना वर्चस्व जताया
कभी
बहसें भी हुईं
स्वर ऊँचे हुए
अहम ने
क्षण भर को दीवारें खड़ी कीं
 
पर फिर
किसी एक की मुस्कान
या किसी की सहज पुकार
सब कुछ पिघला देती
और हम
फिर से एक वृत्त में आ खड़े होते
जहाँ कोई किनारा नहीं था। 
 
हम
हर अपेक्षा पूरी नहीं कर पाए
कभी समय चूक गया
कभी शब्द कम पड़ गए
कभी परिस्थितियाँ
हमारे बीच
अनजानी दूरियाँ ले आईं
 
हमने एक दूसरे की
हर आशा शायद पूरी नहीं की हो
शायद कभी समय नहीं दे पाए
जो देना चाहिए था। 
कभी समझ नहीं पाए उन अपेक्षाओं को
जिन्हें समझना चाहिए था, 
कभी व्यस्तताओं ने
हमारे बीच
अनचाही दूरी खड़ी कर दी
पर हमने
मन को कड़वाहट से भरने नहीं दिया
किसी का व्यवहार
किसी को खटका भी
पर हमने
उसे सम्बन्ध का अंत नहीं बनने दिया। 
 
हममें से कुछ
आज भी उसी स्नेह से जुड़े हैं
कुछ के भीतर
एक अनकहा मौन है
जो अकेलेपन की दीवारों के
पीछे छुपा है
और कुछ
धीरे धीरे
इतने दूर हो गए
जैसे यह साथ
कभी उनका था ही नहीं। 
 
पर जो सच है
वह यह है
कि हम सब
कभी एक थे
एक दूसरे के लिए
खड़े रहने वाले
एक दूसरे को
बिना कहे समझ लेने वाले
 
तुम हमें यूँ भुला न पाओगे
क्योंकि हम
केवल स्मृतियाँ नहीं
एक जीवित अनुभव हैं, 
हम उन ठहाकों में हैं
जो अचानक लौट आते हैं
हम उन ख़ामोशियों में हैं
जहाँ कोई पुराना नाम
मन ही मन लिया जाता है
 
हम उन रास्तों में हैं
जहाँ कभी
हम साथ चले थे
और उन मोड़ों में भी
जहाँ से हम बिखर गए
 
यदि कभी
तुम्हें लगे
कि कुछ अधूरा रह गया
तो समझ लेना
वह हम हैं
जो अब भी
तुम्हारे भीतर
एक अधूरी पर सजीव
कहानी की तरह बसे हैं
 
तुम हमें यूँ भुला न पाओगे
क्योंकि हमने
सिर्फ़ साथ नहीं बिताया था
हमने
एक दूसरे को
अपनी जीवन यात्रा में
गहराई से जिया था। 

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