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कुण्डलियाँ स्वतंत्रता दिवस पर

1.
रोटी महँगी हो गई, त्रस्त बहुत हैं लोग। 
आज़ादी के पर्व पर, महँगाई का जोग। 
महँगाई का जोग, कुपित गण दूर खड़ा है। 
पिचका-पिचका पेट, भूख से ख़ूब लड़ा है। 
तंत्र हुआ स्वछंद, नोचता बोटी-बोटी। 
भारत है आज़ाद, क़ैद में है पर रोटी। 
2.
आज़ादी हम को मिली, शुभ पचहत्तर वर्ष। 
नव विकास पथ हम चले, जन गण मन उत्कर्ष। 
जन गण मन उत्कर्ष, तिरंगा है लहराता। 
एक मेव आवाज़, जयति जय भारत माता। 
संकल्पों की आन, सभी सीना फौलादी। 
नूतन नवल विमर्श, अमिट अविरल आज़ादी। 

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