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ऑनलाइन उपस्थिति

 

विद्यालय में नई व्यवस्था लागू हुई। अब विद्यार्थियों की उपस्थिति मोबाइल ऐप से दर्ज होने लगी। 

प्रधानाचार्य ने घोषणा की, “अब सब कुछ डिजिटल होगा। कोई भी विद्यार्थी अनुपस्थित नहीं छिप सकेगा।” 

कक्षा में अध्यापक ने मोबाइल खोला और नाम पुकारने लगे। 

“आरव।” 

मोबाइल पर हरी बत्ती जल गई—Present

“समीरा।” 

फिर वही हरी बत्ती—Present

एक विद्यार्थी चुप बैठा था। वह मोबाइल को देख रहा था। 

अध्यापक ने उसका नाम पुकारा, “विवेक।” 

मोबाइल पर भी वही हरी बत्ती जल उठी—Present

अध्यापक ने सिर उठाकर देखा। विवेक की आँखें झुकी हुई थीं। 

कक्षा समाप्त होने के बाद अध्यापक ने उसे रोका, “तुम इतने चुप क्यों रहते हो?” 

विवेक ने धीरे से कहा, “सर, पापा विदेश में हैं। मम्मी अस्पताल में नर्स हैं। घर पर मैं और दादी रहते हैं। दादी की आँखें कमज़ोर हैं।” 

अध्यापक ने पूछा, “तो पढ़ाई कैसे करते हो?” 

विवेक बोला, “सर, मोबाइल पर तो रोज़ मेरी उपस्थिति लग जाती है . . . पर कभी-कभी लगता है मैं सच में कहीं भी उपस्थित नहीं हूँ। न घर में न स्कूल में।” 

अध्यापक कुछ क्षण मौन रहे। विवेक का वाक्य उनके कानों में गूँज रहा था। .

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