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हिंदी दिवस पर तीन कुण्डलियाँ छंद


1.
वाणी का शृंगार है, जन-मन का अनुराग। 
संस्कृति का आलोक नव, पावन मंगल-भाग॥
पावन मंगल-भाग, हृदय की भाषा सुंदर। 
ज्ञान-रश्मि विस्तार, प्रकट करती उर अंतर॥
सुरभित शब्द-प्रवाह, मधुर रस मय कल्याणी। 
सकल विश्व में व्याप्त, हमारी अनुपम वाणी॥
2.
सौरभ साहित्यिक सुमन, पावन सुर-सरि धार। 
भाव सुधा-रस से भरा, हिंदी का संसार॥
हिंदी का संसार, तिमिर अज्ञान मिटाए। 
राष्ट्र-हृदय की श्वास, चेतना नित्य जगाए॥
ऋषि-मुनि संत प्रसाद, श्रेष्ठतम निर्मल गौरव। 
पावन गरिमा-युक्त, हमारी हिंदी सौरभ॥
3.
कलकल बहती है सदा, हिंदी निर्मल धार। 
सत्य-अहिंसा बोध का, सुंदर है विस्तार॥
सुंदर है विस्तार, एकता का यह साधन। 
भारत का परिधान, सुसंस्कृत पावन आँगन॥
हिंदी है मम प्राण, हृदय में रहती हर पल। 
हिंदी गंगा नीर, सलिल सम निर्मल कलकल॥

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